Notification

×

Pronews20

Pronews13

Label

Desktop-Top-Ads-Image

Mobile-Top-Ads-Image

Pronews4

Pronews5

सात समंदर पार 'हिंदू राष्ट्र' की गूँज: धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ऑस्ट्रेलिया संसद को करेंगे संबोधित, 14 अप्रैल को ऐतिहासिक कार्यक्रम

Wednesday, 8 April 2026 | April 08, 2026 IST Last Updated 2026-04-08T09:34:27Z

अक्षय भारत : 08 अप्रैल 2026

छतरपुर/सिडनी: भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों के ध्वजवाहक बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री अपने वैश्विक अभियान के तहत ऑस्ट्रेलिया पहुँच चुके हैं। 8 अप्रैल से 15 अप्रैल तक चलने वाले इस प्रवास के दौरान बाबा बागेश्वर ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख शहरों—कैनबरा, पर्थ और सिडनी में आयोजित भव्य कार्यक्रमों के माध्यम से सनातन धर्म का प्रचार करेंगे।

दुनिया भर से उमड़ा भक्तों का सैलाब
पंडित धीरेंद्र शास्त्री की लोकप्रियता का आलम यह है कि उन्हें सुनने के लिए केवल ऑस्ट्रेलिया ही नहीं, बल्कि भारत, अमेरिका, न्यूजीलैंड, कनाडा, फिजी और सिंगापुर सहित करीब 10 देशों से श्रद्धालु वहां पहुँच रहे हैं।

पार्लियामेंट से लेकर ओपेरा हाउस तक: बाबा बागेश्वर का पूरा शेड्यूल
  • 8 अप्रैल (कैनबरा): ऑस्ट्रेलिया की राजधानी कैनबरा के संसद हॉल में महाराज के विशेष सत्संग के साथ दौरे की शुरुआत हुई।
  • 11 और 12 अप्रैल (पर्थ): पर्थ के कन्वेंशन सेंटर में दो दिवसीय 'हनुमंत कथा' का आयोजन होगा, जहाँ स्थानीय भारतीयों और विदेशी नागरिकों को रामायण के प्रसंगों से जोड़ा जाएगा।
  • 13 अप्रैल (सिडनी): सिडनी के प्रसिद्ध हार्बर बीच पर एक विशाल समुद्री जहाज में 'भजन क्लबिंग' का अनूठा आयोजन होगा, जहाँ महाराज भक्तों को आशीर्वचन देंगे।
  • 14 अप्रैल (साउथ पार्लियामेंट): यह इस दौरे का सबसे गौरवशाली पल होगा, जब बाबा बागेश्वर दक्षिण संसद (South Parliament) के एक विशेष सत्र को संबोधित करेंगे।
  • 15 अप्रैल (ओपेरा हाउस): दौरे के समापन पर विश्व प्रसिद्ध सिडनी ओपेरा हाउस में धर्म और आध्यात्मिकता पर चर्चा आयोजित की जाएगी।
सनातन का वैश्विक विस्तार
महाराज के इस दौरे को वैश्विक स्तर पर हिंदू धर्म के प्रसार के रूप में देखा जा रहा है। विदेशी संसद और प्रतिष्ठित ओपेरा हाउस जैसे स्थानों पर उनके संबोधन ने भारतीय समुदाय के बीच उत्साह का माहौल बना दिया है। आयोजकों का मानना है कि इस प्रवास से पश्चिमी देशों में भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान और गहरी समझ विकसित होगी।